What is Constipation? Symptoms, Causes, and Remedies

कब्ज क्या है? लक्षण, कारण और उपाय

कब्ज क्या है?

जब व्यक्ति को बार-बार पेट साफ़ करने में कठिनाई होती है, विशेषकर जब सप्ताह में तीन से कम बार शौच जाता है या मल सख्त, सूखा या टुकड़ों में निकलता है, तो इसे कब्ज (Constipation) कहते हैं। यह कोई बीमारी नहीं बल्कि पाचनतंत्र में हो रही असंतुलन का संकेत है।

कब्ज के लक्षण:

  • सप्ताह में तीन से कम बार शौच जाना

  • मल का सूखा, सख्त या छोटी गांठ जैसा होना

  • दबाव और दर्द के साथ शौच होना

  • पेट पूरी तरह साफ न होने का अहसास

  • मल की बदबू और चिकनाई होना

  • पेट फूलना या गैस महसूस होना

  • मल त्याग के लिए शौचालय में अधिक समय बिताना

  • मल न जाने के कारण पेट में दर्द या खिंचाव

भारत में कब्ज कितनी सामान्य है?

हालिया अध्ययनों के अनुसार, भारत में लगभग 18% से 24% वयस्क लोग कब्ज से पीड़ित हैं।
बड़े शहरों में यह प्रतिशत और भी अधिक देखा गया है।

विशेष ध्यान देने योग्य तथ्य:

  • डायबिटीज़ वाले लोगों में कब्ज की संभावना 2.2 गुना अधिक होती है।

  • थायरॉइड की समस्या हो तो जोखिम 2.4 गुना बढ़ जाता है।

  • एनोरेक्टल डिसऑर्डर होने पर यह खतरा 2.7 गुना अधिक हो जाता है।


कब्ज क्यों होती है? – कब्ज के कारण

कब्ज के कई संयुक्त कारण हो सकते हैं, जैसे:

1. आहार से संबंधित कारण:

  • कम फाइबर (रेशेदार) आहार लेना

  • कम पानी पीना

  • अधिक मक्खन, चीज़ और बेकरी उत्पादों का सेवन

2. आदतें और जीवनशैली:

  • दिनचर्या का अभाव

  • सुबह शौच को टालना

  • लंबे समय तक एक ही जगह बैठकर काम करना

3. मानसिक कारण:

  • उदासी, डिप्रेशन

  • थकान, चिंता, तनाव

4. दवाओं के दुष्प्रभाव:

  • आयरन या कैल्शियम सप्लीमेंट्स

  • पेन किलर्स

  • एंटी डिप्रेसेंट्स


किन लोगों को कब्ज होने का खतरा अधिक होता है?

  • वृद्ध

  • गर्भावस्था या प्रसव के बाद

  • धूम्रपान करने वाले

  • कम फाइबर वाला आहार लेने वाले

  • कम पानी पीने वाले

  • निष्क्रिय जीवनशैली – बैठा हुआ जीवन

  • विशेष दवाओं का सेवन करने वाले

  • डिप्रेशन से ग्रसित

  • नसों के रोग

  • हार्मोनल असंतुलन


कब्ज के प्रकार

  • अचानक (Acute) कब्ज – अचानक होने वाली कब्ज, आमतौर पर आहार या जीवनशैली में बदलाव से होती है।

  • दीर्घकालीन (Chronic) कब्ज – तीन महीने या उससे अधिक समय तक चलने वाली नियमित कठिनाई और अधूरा शौच।

  • धीमी गति वाली कब्ज (Slow Transit) – आंतों की गति बहुत धीमी होने से मल लंबे समय तक पाचन मार्ग में रुकता है।

  • अवरोधक (Obstructive) कब्ज – आंतों में गांठ या रक्तचाप के कारण मल के मार्ग में रुकावट।

  • पेल्विक फ्लोर डिसफंक्शन कब्ज – पेल्विक मांसपेशियों के सही ढंग से काम न करने पर शौच में रुकावट।

  • दवाओं से होने वाली कब्ज – आयरन, पेन किलर या एंटीडिप्रेसेंट जैसी दवाओं के उपयोग से।

  • फंक्शनल कब्ज – कोई स्पष्ट शारीरिक कारण न होते हुए, मस्तिष्क या जीवनशैली के प्रभाव से होने वाली कब्ज।

  • आयुर्वेद के अनुसार कब्ज – वात, पित्त और कफ दोषों के असंतुलन के अनुसार विभिन्न प्रकार की कब्ज।


कब्ज का निदान कैसे होता है?

  • रक्त, मल और मूत्र की जांच

  • एंडोस्कोपी से आंतों का निरीक्षण

  • आंतों की गति की जांच (ट्रांज़िट स्टडी)

  • शौच के समय मांसपेशियों की कार्यक्षमता (मनोमेट्री, डिफेकोग्राफी)

  • गांठ या अन्य अवरोध के लिए स्कैन (CT, MRI)


कब्ज के लिए घरेलू उपाय

1. सुबह खाली पेट गर्म पानी में नींबू रस:
आंतों को स्वाभाविक रूप से सक्रिय करता है।
उपयोग: 1 गिलास गर्म पानी + ½ नींबू का रस + एक चुटकी नमक

2. गाय का घी के साथ गर्म दूध:
पाचनतंत्र को चिकनाई देता है और शौच को नरम करता है।
उपयोग: रात को सोते समय 1 गिलास गर्म दूध + 1 चम्मच ताजा घी

3. ईसबगोल (Psyllium Husk):
मल में नमी और बुल्क बढ़ाता है जिससे मल आसानी से निकलता है।
उपयोग: 1 चम्मच ईसबगोल + गर्म पानी या दूध के साथ रात को

4. त्रिफला चूर्ण:
आयुर्वेद का श्रेष्ठ पाचक और सौम्य विरेचक चूर्ण।
उपयोग: 1 चम्मच त्रिफला चूर्ण + गुनगुने पानी के साथ रात को सोने से पहले

5. एरंड तेल (Castor Oil):
आंतों को उत्तेजित करके शक्तिशाली विरेचन करता है (या डिटॉक्स)।
उपयोग: 1–2 चम्मच एरंड तेल + गुनगुना दूध (सप्ताह में सिर्फ 1–2 बार)

6. सूखे काले अंगूर (मुनक्का):
पाचन सुधारने वाला श्रेष्ठ फल, विशेषकर बच्चों के लिए।
उपयोग: 5–6 मुनक्का रात को पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट खाना

7. अजवाइन और जीरे का काढ़ा:
अपाचन दूर करता है, गैस हटाता है और शौच आसान बनाता है।
उपयोग: ½ चम्मच अजवाइन + ½ चम्मच जीरा उबालकर पानी के रूप में पीना

8. अलसी के बीज (Flaxseed):
फाइबर और ओमेगा-3 से भरपूर, मल को नरम करता है।
उपयोग: 1 चम्मच बीज रात को भिगोकर सुबह खाली पेट खाना

9. पपीता और अमरूद:
दैनिक फल के रूप में सेवन करने से पाचन सुधरता है और कब्ज दूर होती है।
उपयोग: सुबह खाली पेट या रात के खाने के बाद 100–150 ग्राम

10. योग – मलासन, पवनमुक्तासन, वज्रासन
ये योगासन आंतों की गति बढ़ाने के लिए अत्यंत लाभकारी हैं।


अगर मुझे कब्ज हो तो क्या करना चाहिए?

  • तनाव और उदासी से बचें

  • अधिक पानी पिएं

  • फाइबरयुक्त भोजन लें

  • नियमित व्यायाम करें

  • आरामदायक दिनचर्या अपनाएं

  • घरेलू और आयुर्वेदिक उपाय आज़माएं

  • जरूरत हो तो हल्की दवाएं लें

  • लंबे समय से कब्ज है तो विशेषज्ञ डॉक्टर को दिखाएं

  • शराब और धूम्रपान से दूर रहें – ये पाचनतंत्र को खराब कर सकते हैं

  • दवाओं के दुष्प्रभावों पर डॉक्टर की सलाह लें


कब्ज से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुझे कैसे पता चलेगा कि मुझे कब्ज है?
अगर शौच करते समय तनाव महसूस हो, रोज शौच न होता हो, या हमेशा अधूरा लगने का अनुभव हो तो आप कब्ज से पीड़ित हैं।

कब्ज का मुख्य कारण क्या है?
फाइबर की कमी, कम पानी पीना, कम चलना-फिरना, तनाव, दवाएं या हार्मोनल असंतुलन कब्ज के मुख्य कारण हैं।

क्या कब्ज के कोई गंभीर परिणाम हो सकते हैं?
हाँ, लंबे समय तक कब्ज से बवासीर, एनल फिशर, शरीर में विषाक्त पदार्थ जमा होना (टॉक्सिसिटी), आंतों की गति धीमी पड़ना और पेट दर्द हो सकता है।

क्या घरेलू उपायों से कब्ज दूर हो सकती है?
हाँ, त्रिफला, ईसबगोल, नींबू पानी, पपीता, घी-दूध और योगासन कब्ज में बहुत फायदेमंद हैं।

कब्ज से बचने के लिए क्या खाना चाहिए?
फाइबरयुक्त आहार जैसे सब्जियाँ, फल (पपीता, अमरूद), दाल, साबुत गेहूं की रोटी और पर्याप्त पानी पीना चाहिए।

कब्ज के लिए श्रेष्ठ आयुर्वेदिक उपाय कौन सा है?
त्रिफला चूर्ण, हरितकी, ईसबगोल, एरंड तेल और अभ्यंग (तेल मालिश) आयुर्वेद के श्रेष्ठ उपाय हैं।

क्या तनाव से भी कब्ज हो सकती है?
हाँ, तनाव और मानसिक असंतुलन पाचनतंत्र पर सीधा असर डालते हैं और कब्ज का कारण बन सकते हैं।

कब्ज के लिए कौन सी दवाएं लेनी चाहिए?
ज़रूरत पड़ने पर लैक्जेटिव्स (डुलकोलैक्स, मिरालैक्स), ईसबगोल या स्टूल सॉफ्टनर लिए जा सकते हैं, लेकिन लम्बे समय तक नहीं और डॉक्टर की सलाह से ही।

किस स्थिति में तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए?
अगर शौच में खून आए, ज्यादा दर्द हो, वजन अचानक घटे, या 10–15 दिन से अधिक समय तक शौच न हो तो विशेषज्ञ से संपर्क करें।


नोट: यहाँ दी गई जानकारी शिक्षा और मार्गदर्शन के उद्देश्य से है। किसी भी प्रकार की चिकित्सा शुरू करने से पहले चिकित्सकीय सलाह अवश्य लें।


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