Gas, Bloating, and Indigestion: Easy Ways to Get Fast Relief

गैस, पेट फूलना और अपच: जल्द राहत देने वाले आसान उपाय

गैस, पेट फूलना और अपच: तेज़ राहत देने वाले आसान उपाय

गैस, पेट फूलना और अपच वे सामान्य पाचन समस्याएँ हैं जिनका अनुभव ज़्यादातर लोगों को कभी-कभी होता है। यह तकलीफ़ हल्की भारीपन से लेकर पेट में खिंचाव या सूजन जैसे एहसास तक पहुँच सकती है। अधिकतर मामलों में ये लक्षण गंभीर नहीं होते और साधारण जीवनशैली में बदलाव से ठीक हो जाते हैं।

गैस, पेट फूलना और अपच क्यों होते हैं यह समझने से आप इस परेशानी को कम कर सकते हैं और भविष्य में दोबारा न हो, इसके लिए सही उपाय अपनाए जा सकते हैं।

इस लेख में आप जानेंगे कि ये लक्षण क्यों होते हैं, उनके मुख्य कारण क्या हैं, और तेज़ तथा लंबे समय की राहत देने वाले आसान और व्यावहारिक उपाय कौन-से हैं।

गैस और पेट फूलना क्यों होता है

गैस पाचन की एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन जब शरीर इसे समय पर बाहर नहीं निकाल पाता, तो बढ़ी हुई गैस सीधा पेट फूलाती है और असुविधा पैदा करती है।

यह आमतौर पर तब होता है जब हम खाते समय हवा निगल लेते हैं या कुछ खाद्य पदार्थ सही से पच नहीं पाते, जिससे आँतों में गैस बढ़ने लगती है।

1. हवा निगलना (Swallowing Air)

कुछ दैनिक आदतें आपको बिना पता चले ज़्यादा हवा निगलने पर मजबूर कर देती हैं। यह फँसी हुई हवा पेट में जमा होकर डकार, भारीपन और ऊपरी पेट में दबाव जैसी समस्याएँ पैदा करती है।

आप ज़्यादा हवा निगल सकते हैं यदि आप:

  • बहुत तेजी से खाते हैं

  • खाते समय बहुत बात करते हैं

  • च्यूइंग गम चबाते हैं

  • स्ट्रॉ से पीते हैं

  • बहुत गरम या बहुत ठंडे पेय लेते हैं

जो लोग डेंचर (कृत्रिम दाँत) पहनते हैं, यदि फिट सही न हो तो वे ज़्यादा हवा निगल सकते हैं, जिससे डकार, फूलना और असहजता बढ़ सकती है।

सामान्य गैस निकलने की आवृत्ति

दिन में 12 से 25 बार गैस पास होना सामान्य माना जाता है। कई लोगों को खासकर शाम के समय अधिक गैस होती है क्योंकि पूरे दिन की पाचन प्रक्रिया उस समय अंतिम चरण में होती है।

यह जानना आपको प्राकृतिक बदलाव समझने में मदद करता है और अनावश्यक चिंता से भी बचाता है।

2. आँतों में भोजन का फ़र्मेंटेशन

कुछ खाद्य पदार्थ छोटी आँत में पूरी तरह पच नहीं पाते। जब यह अधपचा भोजन बड़ी आँत में पहुँचता है, तो वहाँ मौजूद बैक्टीरिया इसे तोड़ना शुरू करते हैं।

इस प्राकृतिक प्रक्रिया को “फर्मेंटेशन” कहते हैं। इस प्रक्रिया में गैस बनती है, जिससे पेट फूलना, असहजता और पेट में गुड़गुड़ाहट जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।

गैस और फुलावट बढ़ाने वाले सामान्य खाद्य पदार्थ

हर भोजन पाचन पर अलग प्रभाव डालता है।

नीचे दिए गए खाद्य पदार्थ अक्सर गैस और सूजन बढ़ाते हैं:

  • कार्बोनेटेड ड्रिंक्स (सोडा, स्पार्कलिंग वॉटर)

  • राजमा, दाल, चना

  • पत्ता गोभी, फूलगोभी, ब्रोकली, प्याज़

  • सूखे मेवे (ड्राई फ्रूट्स)

  • दूध और दूध उत्पाद (विशेषकर जिन्हें lactase की कमी हो)

  • शुगर-फ्री उत्पाद जिनमें sorbitol, mannitol या maltitol हो

अन्य चीज़ें जो गैस बढ़ा सकती हैं:

  • सेब का रस और बोर/प्रून जूस

  • बहुत मसालेदार, तली या भारी चीज़ें

  • शुगर-फ्री स्वीटनर वाली चीज़ें

महत्वपूर्ण नोट

आपको इन खाद्य पदार्थों को बिल्कुल बंद करने की आवश्यकता नहीं है।

बस ध्यान रखें कि कौन-सी चीज़ें आपको बार-बार गैस देती हैं और उसी अनुसार आहार में थोड़ा बदलाव करें।

गैस, फूलना और असहजता कम करने के सरल उपाय

ये सरल कदम यदि आप नियमित रूप से अपनाएँ, तो आम तौर पर बहुत प्रभावी साबित होते हैं:

1. धीरे-धीरे खाना

यदि आप बहुत तेजी से खाते हैं, तो आप अनजाने में अधिक हवा निगल लेते हैं, जिससे गैस, पेट फूलना और डकार जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।

खाने को ठीक से चबाने से पेट को अपना काम करने के लिए पर्याप्त समय मिलता है और पाचन प्रक्रिया आसान हो जाती है।

खाने में छोटे-छोटे बदलाव—जैसे छोटे कौर लेना, धीरे-धीरे खाना, और कौर के बीच थोड़ा रुकना—पाचन पर बड़ा सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।

2. थोड़ा-थोड़ा और बार-बार भोजन करें

एक बार में अधिक खाना पेट पर ज़्यादा भार डालता है, जिससे भारीपन, फूलना और असहजता हो सकती है।

दिनभर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में और समय-समय पर भोजन करने की आदत पाचन को आसान बनाती है और अतिरिक्त गैस की समस्या भी घटाती है।

इस तरीके से एसिडिटी नियंत्रित रहती है, ब्लड शुगर स्थिर रहता है और पूरे दिन शरीर को स्थिर ऊर्जा मिलती है।

3. पेट के अनुकूल पेय चुनें

बहुत गरम या बहुत ठंडे पेय कभी-कभी असहजता पैदा कर सकते हैं और पेट फूलना बढ़ा सकते हैं, खासकर संवेदनशील पाचनतंत्र वाले लोगों में।

सामान्य तापमान वाले पेय पाचन के लिए अधिक उपयुक्त होते हैं।

यदि आपको ठंडे पेय पसंद हैं, तो उन्हें बहुत तेजी से पीने के बजाय धीरे-धीरे पीने का प्रयास करें।

4. भोजन के बाद सीधा बैठना या थोड़ा चलना

खाने के तुरंत बाद लेटने से पाचन धीमा हो सकता है और एसिड ऊपर की ओर बढ़ सकता है, जिससे अपच और गैस हो सकती है।

20–30 मिनट तक सीधा बैठने या थोड़ा चलने से पेट को भोजन को आसानी से संभालने में मदद मिलती है।

घर में हल्का टहलना भी गैस के जमाव को कम करता है और आँतों की गति को आसान बनाता है।

5. गैस और पेट फूलना कम करने के लिए व्यायाम

नियमित हलचल पाचनतंत्र को सुचारु रूप से काम करने में मदद करती है और गैस को आसानी से बाहर निकलने देती है।

चलना, हल्का स्ट्रेचिंग, या पवनमुक्तासन / वज्रासन जैसे सरल योगासन दबाव कम करते हैं और पेट फूलना घटाते हैं।

दिनभर सक्रिय रहने से कब्ज़ियत भी दूर रहती है, जो गैस के मुख्य कारणों में से एक है।

6. फाइबर वाले खाद्य पदार्थ धीरे-धीरे शामिल करें

फाइबर आंतों (गट) के स्वास्थ्य के लिए बहुत ज़रूरी है और बाउल मूवमेंट को नियमित रखता है।

लेकिन बहुत अधिक फाइबर एक साथ लेने से शुरुआत में गैस और पेट फूलना बढ़ सकता है।

इसलिए फाइबर वाले खाद्य पदार्थों को धीरे-धीरे बढ़ाएँ और पर्याप्त पानी पिएँ।

यह धीरे-धीरे अपनाई गई विधि अचानक पेट फूलने की संभावना कम करती है और हाई-फाइबर आहार के सारे दीर्घकालिक फायदे देती है।

फाइबर वाले खाद्य पदार्थ पूरी तरह न हटाएँ

बीन्स, दालें और कुछ सब्जियाँ शुरुआत में थोड़ा अधिक गैस पैदा कर सकती हैं, लेकिन लंबे समय में ये पाचन के लिए बहुत लाभकारी हैं।

फाइबर वाले खाद्य पदार्थों को आहार से हटाने के बजाय, उन्हें नियमित रूप से शामिल करें और पर्याप्त पानी पिएँ।

नियमित सेवन से पेट धीरे-धीरे इन खाद्य पदार्थों के अनुकूल हो जाता है और असहजता भी अपने आप कम होने लगती है।


प्राकृतिक उपचार से गैस में राहत

गैस और पेट फूलने से होने वाली असहजता में ये सरल घरेलू उपाय अक्सर तेज़ आराम देते हैं:

  • गर्म पुदीना या कैमोमाइल चाय: पाचन मांसपेशियों को आराम देती है और गैस, पेट फूलना और खिंचाव कम करती है।

  • भोजन के बाद सौंफ: थोड़ी मात्रा में सौंफ के बीज चबाने से पेट फूलना कम होता है और पाचनक्रिया आसान बनती है।

  • गर्म पानी में अदरक की चाय या अदरक: अदरक गैस बनने की प्रक्रिया को कम करता है और पेट को शांत करता है, खासकर भारी भोजन के बाद।

  • खाने में या गर्म पानी में हल्दी: हल्दी पाचनतंत्र में सूजन कम करने में मदद करती है और संपूर्ण पाचन को सहारा देती है।

  • सुबह गर्म नींबू पानी: पाचन को सक्रिय करता है, मेटाबॉलिज़्म सुधारता है और सुबह का पेट फूलना कम करता है।

ये प्राकृतिक उपाय पाचन को सहायता देते हैं, पेट को शांत रखते हैं और पूरे दिन की असुविधा को कम कर सकते हैं।

यदि ये घरेलू उपाय उपलब्ध न हों, तो आप गैस से राहत और भोजन के बाद आसान पाचन के लिए निरांत चूर्ण जैसे प्लांट-बेस्ड पाउडर विकल्प भी ले सकते हैं।


गैस, फूलना और अपच कम करने के लिए उपलब्ध OTC विकल्प

यदि लक्षण बने रहें, तो कुछ ओवर-द-काउंटर (OTC) दवाएँ तेज़ राहत दे सकती हैं।
हमेशा लेबल पढ़ें और निर्देशों के अनुसार ही उपयोग करें।

सिमेथिकोन (Simethicone): बड़ी गैस की बुलबुलियों को छोटे हिस्सों में तोड़ने में मदद करता है, जिससे शरीर उन्हें आसानी से बाहर निकाल सके।  फूलना और दबाव में तेज़ राहत देता है।

एक्टिवेटेड चारकोल (Activaed Charcoal): पाचनतंत्र में बनी गैस को अवशोषित करने में मदद करता है और पेट फूलना कम करता है।  गैस पैदा करने वाला भोजन खाने के तुरंत बाद लेने पर अधिक असरकारी होता है।

लैक्टेज एंज़ाइम (Lactase Enzyme): उन लोगों के लिए उपयोगी जिन्हें दूध पचाने में दिक्कत होती है। यह एंज़ाइम दूध में मौजूद लैक्टोज़ को तोड़ता है, जिससे दूध या डेयरी उत्पाद खाने के बाद गैस, पेट फूलना और ऐंठन से बचाव होता है।

डाइजेस्टिव एंज़ाइम सप्लीमेंट्स (Digestive Enzyme Supplements): चर्बी, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट को अधिक प्रभावशाली तरीके से तोड़ने में मदद करते हैं। भारी भोजन या पचने में कठिन खोराक के बाद अपच या गैस में लाभकारी। टार्गेटेड एंज़ाइम सप्लीमेंट्स (Beano जैसे)

राजमा, छोले, दाल और ब्रोकली, गोभी, फूलगोभी, प्याज़ जैसी सब्जियों में मौजूद जटिल कार्बोहाइड्रेट को तोड़ने में मदद करते हैं। भोजन से पहले लेने पर गैस बनने की संभावना कम हो जाती है।

महत्वपूर्ण नोट:

घरेलू उपाय और OTC उत्पाद तात्कालिक राहत दे सकते हैं, लेकिन यह चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं हैं।

यदि लक्षण बार-बार हों या लंबे समय तक बने रहें, तो उचित मार्गदर्शन के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना ज़रूरी है।

सारांश में

गैस, पेट फूलना और अपच अक्सर हमारी खाने की आदतों और भोजन की पसंद से जुड़ा होता है।

धीरे खाना, उचित मात्रा में भोजन लेना और नियमित खाने की आदत जैसे छोटे बदलाव थोड़े समय में अच्छी राहत दे सकते हैं।

आपको असहजता किस वजह से होती है, यह पहचानें और उसके अनुसार अपनी रोज़मर्रा की आदतों में छोटे-छोटे बदलाव करें।

ऐसे नियमित छोटे सुधार पाचन को धीरे-धीरे अपने आप बेहतर बनाने लगते हैं।

यदि इन बदलावों के बाद भी लक्षण बार-बार दिखाई दें, तो सही मार्गदर्शन के लिए डॉक्टर से सलाह लेना सबसे बेहतर रहेगा।


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